क्या लोगो के धर्म कुछ सो सालो में बदल जाते है।

 क्या लोगो के धर्म कुछ सो सालो में बदल जाते है। 

आज हमारे जो भी धर्म है जो भी हम उनको नाम देते है वो ५००० साल या कहे ३५०० साल से जयादा पुराने नहीं होंगे। अगर उससे पहले के धर्म नहीं बचे तो आज के समय के धर्म आने वाले कुछ सो सालो में कहा बचने वाले है वो जो चीज़ आपकी आने वाली कुछ पीढ़ियों में भी नहीं जाने वाली उसके लिए इतना गरूर। इतना खून। 

धर्म के आरम्भ को जानना मेरे लिए बहुत जरूरी है। मेरे बहुत से सवाल है मन मै जो मै पाना चाहता हूँ। और वो तब ही मिल पाएंगे जब मै मनुष्य के उदगम से लेकर उसके धर्म से जुड़े पहलू तक न जान लू। 

क्यों एक इंसान को धर्म की जरूरत पड़ी जबकि वो बिना धर्म के वो सब कर सकता था जो वो करना चाहता है। १९ वि सदी के अंत में और २० वि सदी के शुरुआत में एक नयी शाशन प्रणाली का जन्म हो रहा था जिसे कम्मुनिस्ट या समाजवाद कहा गया।  ज्यातर देशो में यह कामयाब नहीं रहा पर फिर भी यह दुनिया को वो दे गया जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कऱ सकते थे। 

समाजवाद का मूल धर्म को त्याग करना है और इससे दूर रहना है। जब लोग धर्म से दूर गए तो उन्होंने जाना की हम अंतरिक्ष में भी जा सकते है। सोवियत यूनियन ही वो पहला देश था जिसने अंतरिक्ष विज्ञानं में कदम रखा। अमेरिका तो सोवियत संघ से आगे निकलना चाहता था इसलिए वो अंतरिक्ष में सोवियत संघ के बाद तेजी से बढ़ने लगा। अगर सोवियत संघ नहीं होता तो शायद आज भी हम दुनिया के सभी धर्मो के ग्रंथो में लिखे हुए के अनुसार चपटी ही मान रहे होते। और कुरान बाइबिल पुराणों को हम आज तक खुदा गॉड भगवान के द्वारा लिखी हुई किताबे ही मान रहे होते। 

धरती गोल है यह सत्य इन सभी पुस्तकों को झूठा साबित करता है। और इनको इंसान द्वारा लिखी हुई ही किताबे सिद्ध करता है। 

लेकिन कमाल की बात ये है की धर्म विमुक्त होकर शुरू किये गए काम को बाद में धर्म से जोड़ दिया जाता है और बड़े बड़े धर्म ज्ञाता अपने ग्रंथो में लिखी गलत बातो को छुपाकर नयी नयी खोजो को अपने धर्म से जोड़ना शुरू कर देते है। अब भी चाहे अमेरिका हो या कोई देश वो अंतरिक्ष में विमान भेजने से पहले वहां विद्यमान धर्म के अनुसार रीती करता है। 

ऐसा ही तो होता आया है सदियों से 

किसी भी धर्म का उद्गम किसी बुराई या परिवर्तन के लिए होता है और तोड़े समय में ही वो अपने असली मकसद से हट कर उसकी पुरानी बुराइयों को खुद में अपना लेता है। आज के लगभग हर धर्म में आपको सभी वो बुराइयाँ मिलेगी जिनको खत्म करने के लिए उनका जन्म हुआ था। 

कोलंबस अगर बाइबिल की मान कर सुमद्र में नहीं जाता और ये मान लेता की धरती चपटी है और वो कही न कही खत्म हो जाएगी तो जैसा संसार आज हम देख रहे है वो कभी नहीं हो पता। 

जिसने धर्म से मुक्त होकर खुद पर विश्वास किया है वो कुछ न कुछ नया करने में कामयाब रहा है। फिर भी दुनिया की ज्यादातर आबादी धर्म पर खुद से ज्यादा विश्वास करती है यहाँ तक की उन बातो पर भी विश्वास करती है जो समय के साथ गलत साबित हो चुकी है या जो उनमे लिखी ही नहीं गयी है बस किसी तोड़े से जयादा धर्म ज्ञान वाले बन्दे ने अपने आप से कह दी हो। 

कल जब आज विद्यमान धर्म बदल जायेंगे तो उसके साथ हमारे अल्लाह गॉड भगवान् भी बदल जायेंगे।