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क्या लोगो के धर्म कुछ सो सालो में बदल जाते है।

 क्या लोगो के धर्म कुछ सो सालो में बदल जाते है।  आज हमारे जो भी धर्म है जो भी हम उनको नाम देते है वो ५००० साल या कहे ३५०० साल से जयादा पुराने नहीं होंगे। अगर उससे पहले के धर्म नहीं बचे तो आज के समय के धर्म आने वाले कुछ सो सालो में कहा बचने वाले है वो जो चीज़ आपकी आने वाली कुछ पीढ़ियों में भी नहीं जाने वाली उसके लिए इतना गरूर। इतना खून।  धर्म के आरम्भ को जानना मेरे लिए बहुत जरूरी है। मेरे बहुत से सवाल है मन मै जो मै पाना चाहता हूँ। और वो तब ही मिल पाएंगे जब मै मनुष्य के उदगम से लेकर उसके धर्म से जुड़े पहलू तक न जान लू।  क्यों एक इंसान को धर्म की जरूरत पड़ी जबकि वो बिना धर्म के वो सब कर सकता था जो वो करना चाहता है। १९ वि सदी के अंत में और २० वि सदी के शुरुआत में एक नयी शाशन प्रणाली का जन्म हो रहा था जिसे कम्मुनिस्ट या समाजवाद कहा गया।  ज्यातर देशो में यह कामयाब नहीं रहा पर फिर भी यह दुनिया को वो दे गया जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कऱ सकते थे।  समाजवाद का मूल धर्म को त्याग करना है और इससे दूर रहना है। जब लोग धर्म से दूर गए तो उन्होंने जाना की हम अंतरिक्ष में भ...

सफर शुरू होता है एक अनजाने अनसुलझे रहष्य से

 ये सफर शुरू होता है एक अनजाने अनसुलझे रहष्य से। जहा से हम शुरुआत करेंगे वो अंत भी हो सकता है और प्रांरभ भी।  मेरे पास न कोई रास्ता है , न कोई मंजिल। ये सफर ही तय करेगा की कहाँ जाना है।  यह कोई लॉजिक काम नहीं करेगा और न ही कोई तर्क। फिर भी हर जगह लॉजिक  और तर्को का सहारा लिया जायेगा।  मेरे पास कोई रास्ता नहीं है तो शुरुआत में भटक जाना ही जरूरी है।  जब हमारे पास रास्ता नहीं होता तो बस झोला उठाकर चल देना ही काफी होता है।  आओ चलते है भटकने के लिए। उस रहश्य का पता करने जो मेरे मन को अशांत किये रहता है।  जो बार बार मुझे कहता है की यही तेरी मंजिल है।  ये मेरा वहम है या कुछ और पता नहीं।  पर जो भी है बहुत अजीब है। कोई इसे समझ नहीं सकता। मै खुद भी नहीं। ये कोई कहानी नहीं होने जा रही है , न ही हम इसे इस तरह लिखेंगे।  ये रिलिजन के हर पहलू को जानने की कोशिस  करेगी। क्यों एक इंसान को धर्म की जरूरत है और है भी तो क्या इतनी की वो इसके लिए दूसरे इंसान को मार सकता है।  आज भी मई इसे लिखना शुरू नहीं करता अगर आफ्टर लाइफ के बारे में डिस्कवरी प...